"यथा सूर्यस्य गत्या वै, कालो भिद्यते अष्टधा।
तथा चौघड़िया प्रोक्तं, कार्य सिद्धयर्थमुत्तमम्॥"
(जिस प्रकार सूर्य की गति से समय आठ भागों में बँटता है, उसी प्रकार कार्य सिद्धि के लिए चौघड़िया उत्तम कहा गया है।)
वैदिक ज्योतिष का वह प्राचीन 'तात्कालिक मुहूर्त' (Instant Auspicious Time) शास्त्र जो सूर्य और ग्रहों की 'होरा' पर आधारित है। जानिए अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल और उद्वेग का वैज्ञानिक आधार और प्रभाव।
भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में 'काल' (समय) को केवल एक माप नहीं, बल्कि एक ऊर्जा माना गया है। मुहूर्त चिंतामणि और बृहत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है कि "सही समय पर किया गया कार्य बिना प्रयास के फल देता है।"
ऐतिहासिक रूप से, 'चौघड़िया' (चार-घटी का समय) का उपयोग राजा-महाराजाओं द्वारा युद्ध प्रस्थान और आपातकालीन यात्राओं के लिए किया जाता था। जब पंचांग शुद्धि (तिथि, नक्षत्र, योग) देखने का समय न हो, तब सूर्य पर आधारित यह गणना अचूक मानी जाती है।
चौघड़िया कोई स्थिर समय नहीं है। यह पूर्णतः सूर्य सिद्धांत पर कार्य करता है। इसकी सटीकता आपके स्थान (अक्षांश/देशांतर) और सूर्योदय पर निर्भर करती है।
वैदिक दिन को दो भागों में बांटा गया है:
उदाहरण: यदि दिन 14 घंटे (840 मिनट) का है, तो एक चौघड़िया 90 मिनट का नहीं, बल्कि 105 मिनट (1 घंटा 45 मिनट) का होगा।
सात ग्रह (सूर्य से शनि) अपने स्वभाव (गुण) के अनुसार समय को प्रभावित करते हैं।
स्वामी: चन्द्रमा (Moon)
चन्द्रमा अमृत का कलश है। यह समय 'मृत्युंजय' तुल्य माना जाता है।
स्वामी: बृहस्पति (Jupiter)
देवगुरु बृहस्पति ज्ञान और वृद्धि के कारक हैं। कल्याणकारी समय।
स्वामी: बुध (Mercury)
बुध बुद्धि और व्यापार के देवता हैं। 'लाभ' का अर्थ है प्राप्ति।
स्वामी: शुक्र (Venus)
शुक्र भोग और गति के कारक हैं। यह एक गतिशील मुहूर्त है।
स्वामी: सूर्य (Sun)
सूर्य का उग्र प्रभाव मानसिक चिंता और संताप देता है।
स्वामी: शनि (Saturn)
शनि विलंब और बाधा के कारक हैं। यह समय 'विष' समान है।
स्वामी: मंगल (Mars)
मंगल रक्त और विवाद के कारक हैं। संघर्ष की स्थिति बनती है।
सप्ताह के जिस वार का सूर्योदय होता है, उस दिन की प्रथम होरा (मुहूर्त) उसी ग्रह की होती है।
| वार (Day) | दिन का प्रथम मुहूर्त | रात्रि का प्रथम मुहूर्त | क्रम प्रवाह |
|---|---|---|---|
| रविवार | उद्वेग | शुभ | उद्वेग → चर → लाभ → अमृत... |
| सोमवार | अमृत | चर | अमृत → काल → शुभ → रोग... |
| मंगलवार | रोग | काल | रोग → उद्वेग → चर → लाभ... |
| बुधवार | लाभ | उद्वेग | लाभ → अमृत → काल → शुभ... |
| गुरुवार | शुभ | अमृत | शुभ → रोग → उद्वेग → चर... |
| शुक्रवार | चर | रोग | चर → लाभ → अमृत → काल... |
| शनिवार | काल | लाभ | काल → शुभ → रोग → उद्वेग... |
यदि 'अमृत' या 'शुभ' चौघड़िया चल रहा हो, किन्तु उसी समय राहु काल आ जाए, तो वैदिक नियम अनुसार राहु काल को प्रधानता दी जाती है और वह समय त्याज्य हो जाता है।
यदि आपातकाल में अशुभ चौघड़िया में यात्रा अनिवार्य हो, तो ऋषियों ने कुछ द्रव्यों (Substances) के सेवन का विधान बताया है:
चौघड़िया के सिद्धांत केवल लोक मान्यता नहीं हैं, बल्कि कई वैदिक और तांत्रिक ग्रंथों में प्रमाणित हैं। विशेषकर ब्राह्म पुराण, मुहूर्त चिंतामणि, दैवज्ञ भाग, वृहत संहिता, मानसागरी होरा और पराशर ज्योतिष सूत्र में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।
"कालं विना न कर्तव्यं कर्म किञ्चन मानवैः।
शुभे समये यत् कर्म तत् सिद्धिं लभते ध्रुवम्॥"
(जो कार्य शुभ समय में किए जाते हैं, वे सफल होते हैं; बुरे समय में किया कार्य असफलता, विलंब और बाधा लाता है।)
प्रत्येक ग्रह की एक विशेष ऊर्जा आवृत्ति (Frequency Signature) होती है, जो चौघड़िया में समय के साथ बढ़ती-घटती रहती है।
भारतीय ज्योतिष केवल भविष्य का अनुमान नहीं है, बल्कि यह मानव व्यवहार और घटनाओं का काल आधारित अध्ययन है। समय के बदलने से मानसिक तरंगों में परिवर्तन होता है, निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है, और भावनाओं में उतार-चढ़ाव आता है।
ऋषि-मुनी अमृत और शुभ चौघड़िया में ध्यान, जप, और स्वाध्याय करना सर्वोत्तम मानते हैं। लाभ चौघड़िया में हवन और संकल्प विशेष फलदायी होता है।
विवाह, व्यापार, यात्रा, धन निवेश, मेडिकल उपचार, परीक्षा, इंटरव्यू, नया घर या वाहन लेने में चौघड़िया एक सरल परंतु सटीक मार्गदर्शक सिद्ध होता है।
"समय ही देवता है"
समय किसी व्यक्ति की प्रतीक्षा नहीं करता। परंतु, जो व्यक्ति समय की प्रकृति को समझ लेता है, समय स्वयं उसका सहायक बन जाता है।
चौघड़िया ज्योतिष का वह भाग है जो केवल अगम्य सिद्धांत नहीं, बल्कि सरल और व्यवहारिक जीवन सूत्र है।
सही समय = आधी सफलता।
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