Panchang

🕉️ वैदिक पंचांग व गोचर

📅 आज की तिथि (Aaj Ki Tithi)

🌅 सूर्योदय

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🌇 सूर्यास्त

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🌗 पक्ष/मास

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✨ आज का चौघड़िया व शुभ मुहूर्त

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📿 ब्रह्म मुहूर्त

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🎯 अभिजित मुहूर्त

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🍯 अमृत काल

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⛔ वर्ज्य

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🧭 दिशा शूल

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मासिक पंचांग (Monthly Calendar)

New Delhi, India
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रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि

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-- बीता-- शेष

✨ नक्षत्र (Nakshatra)

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🧘 योग (Yoga)

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⏳ करण (Karana)

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🌞 सूर्य (Sun)

🌅 --
🌇 --

🌝 चंद्र (Moon)

🌙 --
🌘 --

🌗 राशि / पक्ष

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1. शुक्ल प्रतिपदा

नंदा (आनंद)
वैदिक ज्योतिष और हिन्दू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को अत्यंत शुभ 'नंदा' तिथि माना जाता है।
✦ स्वामी: अग्नि देव

2. शुक्ल द्वितीया

भद्रा (कल्याण)
द्वितीया तिथि 'भद्रा' संज्ञक मानी गई है, जिसका अर्थ है जीवन में कल्याणकारी योग। यह तिथि किसी भी नए मांगलिक कार्य की नींव रखने के लिए सबसे मजबूत मानी जाती है।
✦ स्वामी: ब्रह्मा (विधाता)

3. शुक्ल तृतीया

जया (विजय)
तृतीया तिथि अपने वर्ग 'जया' के अनुरूप विजय और शक्ति की साक्षात प्रतीक है। वैदिक पंचांग के अनुसार, किसी भी बड़े कार्य या प्रतियोगिता में सफलता के लिए इस शुभ मुहूर्त का चयन करें।
✦ स्वामी: गौरी (माता पार्वती)

4. शुक्ल चतुर्थी

रिक्ता (खाली)
चतुर्थी तिथि 'रिक्ता' (खाली) श्रेणी में आती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह या गृह प्रवेश जैसे शुभ मांगलिक कार्य इस दिन वर्जित हैं।
✦ स्वामी: श्री गणेश

5. शुक्ल पंचमी

पूर्णा (पूर्णता)
पंचमी तिथि को 'पूर्णा' तिथि कहा जाता है, जो जीवन के सभी प्रयासों को सफलता के साथ पूर्ण करती है।
✦ स्वामी: नाग देवता

6. शुक्ल षष्ठी

नंदा (आनंद)
षष्ठी तिथि पुनः 'नंदा' श्रेणी में आती है, जो हर्ष और उल्लास लाती है। वैदिक ज्योतिष इसे वास्तुकला, शिल्प, कला और नए वस्त्र-आभूषण धारण करने के शुभ मुहूर्त के रूप में देखता है।
✦ स्वामी: कार्तिकेय

7. शुक्ल सप्तमी

भद्रा (कल्याण)
सप्तमी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है जिसके स्वामी साक्षात् सूर्य देव हैं। हिन्दू पंचांग में इसे स्वास्थ्य, निरोगी काया और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति का दिन माना गया है।
✦ स्वामी: सूर्य देव

8. शुक्ल अष्टमी

जया (विजय)
अष्टमी तिथि 'जया' श्रेणी की एक अत्यंत प्रभावशाली और उग्र तिथि है। यह दैवीय शक्ति की उपासना और हर क्षेत्र में विजय प्राप्त करने का दिन है।
✦ स्वामी: भगवान शिव

9. शुक्ल नवमी

रिक्ता (खाली)
नवमी तिथि 'रिक्ता' संज्ञक होने के कारण विवाह व सगाई जैसे कोमल मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती।
✦ स्वामी: माँ दुर्गा

10. शुक्ल दशमी

पूर्णा (पूर्णता)
दशमी तिथि 'पूर्णा' है, जो आपके सभी कार्यों में सफलता और स्थिरता लाती है। यह दिन धर्म, अर्थ और कर्म की सिद्धि के लिए सर्वोत्तम है।
✦ स्वामी: यमराज

11. शुक्ल एकादशी

नंदा (आनंद)
एकादशी हिन्दू पंचांग की सबसे पवित्र और आध्यात्मिक तिथियों में से एक है। इसे 'नंदा' तिथि कहा जाता है।
✦ स्वामी: विश्वेदेव

12. शुक्ल द्वादशी

भद्रा (कल्याण)
द्वादशी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है, जिसे एकादशी व्रत के पावन पारण के लिए जाना जाता है। यह दिन यज्ञ, दान और बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: भगवान विष्णु

13. शुक्ल त्रयोदशी

जया (विजय)
त्रयोदशी तिथि 'जया' श्रेणी की है और शिव कृपा (प्रदोष व्रत) के लिए विख्यात है। आरोग्य प्राप्ति, शारीरिक दोषों के शमन और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए यह तिथि अमोघ है।
✦ स्वामी: कामदेव / शिव

14. शुक्ल चतुर्दशी

रिक्ता (खाली)
चतुर्दशी तिथि 'रिक्ता' श्रेणी की एक क्रूर तिथि मानी जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस दिन विवाह, नामकरण या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित हैं।
✦ स्वामी: भगवान शिव

15. पूर्णिमा (शुक्ल)

पूर्णा (पूर्णता)
पूर्णिमा हिन्दू पंचांग की सर्वाधिक ऊर्जावान तिथि है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा बिखेरता है।
✦ स्वामी: चंद्र देव

16. कृष्ण प्रतिपदा

नंदा (आनंद)
कृष्ण पक्ष का आरंभ इसी तिथि से होता है। इसे 'नंदा' तिथि माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भले ही चंद्रमा का क्षय शुरू हो गया हो, फिर भी कृषि, धार्मिक कार्य और आंतरिक ऊर्जा के कार्यों के लिए यह उत्तम शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: अग्नि देव

17. कृष्ण द्वितीया

भद्रा (कल्याण)
कृष्ण द्वितीया को 'भद्रा' संज्ञक माना गया है। हिन्दू पंचांग इसे स्थायी संपत्तियों के क्रय-विक्रय और निर्माण कार्यों की नींव रखने के लिए एक शक्तिशाली दिन मानता है।
✦ स्वामी: ब्रह्मा (विधाता)

18. कृष्ण तृतीया

जया (विजय)
कृष्ण पक्ष की यह 'जया' तिथि कोर्ट-कचहरी के मामलों और कठिन प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त करने के लिए अनुकूल मानी जाती है।
✦ स्वामी: गौरी (माता पार्वती)

19. कृष्ण चतुर्थी

रिक्ता (खाली)
संकष्टी चतुर्थी का यह पावन दिन 'रिक्ता' श्रेणी में आता है। सामान्य मांगलिक कार्य इस दिन टाले जाते हैं, परंतु विघ्नहर्ता गणेश जी की आराधना और जीवन की गंभीर बाधाओं को दूर करने के लिए यह सबसे बड़ा शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: श्री गणेश

20. कृष्ण पंचमी

पूर्णा (पूर्णता)
कृष्ण पंचमी एक 'पूर्णा' तिथि है, जो विद्या, संगीत, अनुसंधान और कला क्षेत्र में गहरी सफलता के लिए उत्तम मानी जाती है।
✦ स्वामी: नाग देवता

21. कृष्ण षष्ठी

नंदा (आनंद)
कृष्ण पक्ष की यह षष्ठी तिथि 'नंदा' श्रेणी में आती है। हिन्दू पंचांग इसे वास्तुकला, शिल्प और नए वस्त्र-आभूषण धारण करने के लिए मध्यम रूप से फलदायी मानता है।
✦ स्वामी: कार्तिकेय

22. कृष्ण सप्तमी

भद्रा (कल्याण)
सप्तमी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह स्वास्थ्य संबंधी उपचार, सर्जरी, और चिकित्सा से जुड़े कार्यों की शुरुआत के लिए एक विशेष शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: सूर्य देव

23. कृष्ण अष्टमी

जया (विजय)
कालाष्टमी का दिन 'जया' श्रेणी का होता है। तंत्र साधना, योग, ध्यान और भगवान भैरव की विशेष कृपा के लिए हिन्दू पंचांग में यह सर्वाधिक शक्तिशाली तिथि है।
✦ स्वामी: भगवान शिव

24. कृष्ण नवमी

रिक्ता (खाली)
कृष्ण नवमी 'रिक्ता' संज्ञक होने के कारण किसी भी शुभ मांगलिक कार्य (विवाह, गृह प्रवेश) के लिए पूर्णतः निषिद्ध है।
✦ स्वामी: माँ दुर्गा

25. कृष्ण दशमी

पूर्णा (पूर्णता)
दशमी तिथि 'पूर्णा' होने के कारण अत्यंत शुभ है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सरकारी कार्य, पदभार ग्रहण और यात्राओं के लिए यह दिन शुभ परिणाम और सफलता देता है।
✦ स्वामी: यमराज

26. कृष्ण एकादशी

नंदा (आनंद)
यह 'नंदा' संज्ञक तिथि है जो पापों के नाश और आत्म-शुद्धि के लिए वैदिक ज्योतिष में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
✦ स्वामी: विश्वेदेव

27. कृष्ण द्वादशी

भद्रा (कल्याण)
द्वादशी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है, जो एकादशी व्रत का पारण करने का पवित्र दिन है। हिन्दू पंचांग के अनुसार दान-पुण्य, परोपकार और स्थिर कार्यों के लिए यह एक उत्तम शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: भगवान विष्णु

28. कृष्ण त्रयोदशी

जया (विजय)
यह 'जया' तिथि कृष्ण पक्ष के शिव प्रदोष व्रत का दिन है। आरोग्य प्राप्ति और शिव आराधना के लिए यह वैदिक ज्योतिष में प्रभावशाली मानी गई है।
✦ स्वामी: कामदेव / शिव

29. कृष्ण चतुर्दशी

रिक्ता (खाली)
मासिक शिवरात्रि का पावन दिन 'रिक्ता' श्रेणी में आता है। भौतिक व कोमल मांगलिक कार्य इस दिन पूर्ण रूप से वर्जित हैं।
✦ स्वामी: भगवान शिव

30. अमावस्या

पूर्णा (पूर्णता)
अमावस्या वैदिक ज्योतिष की 'पूर्णा' तिथि है जब चंद्रमा अदृश्य रहता है। पितृ तर्पण, श्राद्ध, और ध्यान के लिए यह विशेष महत्व रखती है।
✦ स्वामी: पितृ देव
बुध
शुक्र
सूर्य
चंद्र
मंगल
गुरु
शनि
राहु
केतु

1. शुक्ल प्रतिपदा

नंदा (आनंद)
वैदिक ज्योतिष और हिन्दू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को अत्यंत शुभ 'नंदा' तिथि माना जाता है।
✦ स्वामी: अग्नि देव

2. शुक्ल द्वितीया

भद्रा (कल्याण)
द्वितीया तिथि 'भद्रा' संज्ञक मानी गई है, जिसका अर्थ है जीवन में कल्याणकारी योग। यह तिथि किसी भी नए मांगलिक कार्य की नींव रखने के लिए सबसे मजबूत मानी जाती है।
✦ स्वामी: ब्रह्मा (विधाता)

3. शुक्ल तृतीया

जया (विजय)
तृतीया तिथि अपने वर्ग 'जया' के अनुरूप विजय और शक्ति की साक्षात प्रतीक है। वैदिक पंचांग के अनुसार, किसी भी बड़े कार्य या प्रतियोगिता में सफलता के लिए इस शुभ मुहूर्त का चयन करें।
✦ स्वामी: गौरी (माता पार्वती)

4. शुक्ल चतुर्थी

रिक्ता (खाली)
चतुर्थी तिथि 'रिक्ता' (खाली) श्रेणी में आती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह या गृह प्रवेश जैसे शुभ मांगलिक कार्य इस दिन वर्जित हैं।
✦ स्वामी: श्री गणेश

5. शुक्ल पंचमी

पूर्णा (पूर्णता)
पंचमी तिथि को 'पूर्णा' तिथि कहा जाता है, जो जीवन के सभी प्रयासों को सफलता के साथ पूर्ण करती है।
✦ स्वामी: नाग देवता

6. शुक्ल षष्ठी

नंदा (आनंद)
षष्ठी तिथि पुनः 'नंदा' श्रेणी में आती है, जो हर्ष और उल्लास लाती है। वैदिक ज्योतिष इसे वास्तुकला, शिल्प, कला और नए वस्त्र-आभूषण धारण करने के शुभ मुहूर्त के रूप में देखता है।
✦ स्वामी: कार्तिकेय

7. शुक्ल सप्तमी

भद्रा (कल्याण)
सप्तमी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है जिसके स्वामी साक्षात् सूर्य देव हैं। हिन्दू पंचांग में इसे स्वास्थ्य, निरोगी काया और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति का दिन माना गया है।
✦ स्वामी: सूर्य देव

8. शुक्ल अष्टमी

जया (विजय)
अष्टमी तिथि 'जया' श्रेणी की एक अत्यंत प्रभावशाली और उग्र तिथि है। यह दैवीय शक्ति की उपासना और हर क्षेत्र में विजय प्राप्त करने का दिन है।
✦ स्वामी: भगवान शिव

9. शुक्ल नवमी

रिक्ता (खाली)
नवमी तिथि 'रिक्ता' संज्ञक होने के कारण विवाह व सगाई जैसे कोमल मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती।
✦ स्वामी: माँ दुर्गा

10. शुक्ल दशमी

पूर्णा (पूर्णता)
दशमी तिथि 'पूर्णा' है, जो आपके सभी कार्यों में सफलता और स्थिरता लाती है। यह दिन धर्म, अर्थ और कर्म की सिद्धि के लिए सर्वोत्तम है।
✦ स्वामी: यमराज

11. शुक्ल एकादशी

नंदा (आनंद)
एकादशी हिन्दू पंचांग की सबसे पवित्र और आध्यात्मिक तिथियों में से एक है। इसे 'नंदा' तिथि कहा जाता है।
✦ स्वामी: विश्वेदेव

12. शुक्ल द्वादशी

भद्रा (कल्याण)
द्वादशी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है, जिसे एकादशी व्रत के पावन पारण के लिए जाना जाता है। यह दिन यज्ञ, दान और बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: भगवान विष्णु

13. शुक्ल त्रयोदशी

जया (विजय)
त्रयोदशी तिथि 'जया' श्रेणी की है और शिव कृपा (प्रदोष व्रत) के लिए विख्यात है। आरोग्य प्राप्ति, शारीरिक दोषों के शमन और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए यह तिथि अमोघ है।
✦ स्वामी: कामदेव / शिव

14. शुक्ल चतुर्दशी

रिक्ता (खाली)
चतुर्दशी तिथि 'रिक्ता' श्रेणी की एक क्रूर तिथि मानी जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस दिन विवाह, नामकरण या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित हैं।
✦ स्वामी: भगवान शिव

15. पूर्णिमा (शुक्ल)

पूर्णा (पूर्णता)
पूर्णिमा हिन्दू पंचांग की सर्वाधिक ऊर्जावान तिथि है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा बिखेरता है।
✦ स्वामी: चंद्र देव

16. कृष्ण प्रतिपदा

नंदा (आनंद)
कृष्ण पक्ष का आरंभ इसी तिथि से होता है। इसे 'नंदा' तिथि माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भले ही चंद्रमा का क्षय शुरू हो गया हो, फिर भी कृषि, धार्मिक कार्य और आंतरिक ऊर्जा के कार्यों के लिए यह उत्तम शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: अग्नि देव

17. कृष्ण द्वितीया

भद्रा (कल्याण)
कृष्ण द्वितीया को 'भद्रा' संज्ञक माना गया है। हिन्दू पंचांग इसे स्थायी संपत्तियों के क्रय-विक्रय और निर्माण कार्यों की नींव रखने के लिए एक शक्तिशाली दिन मानता है।
✦ स्वामी: ब्रह्मा (विधाता)

18. कृष्ण तृतीया

जया (विजय)
कृष्ण पक्ष की यह 'जया' तिथि कोर्ट-कचहरी के मामलों और कठिन प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त करने के लिए अनुकूल मानी जाती है।
✦ स्वामी: गौरी (माता पार्वती)

19. कृष्ण चतुर्थी

रिक्ता (खाली)
संकष्टी चतुर्थी का यह पावन दिन 'रिक्ता' श्रेणी में आता है। सामान्य मांगलिक कार्य इस दिन टाले जाते हैं, परंतु विघ्नहर्ता गणेश जी की आराधना और जीवन की गंभीर बाधाओं को दूर करने के लिए यह सबसे बड़ा शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: श्री गणेश

20. कृष्ण पंचमी

पूर्णा (पूर्णता)
कृष्ण पंचमी एक 'पूर्णा' तिथि है, जो विद्या, संगीत, अनुसंधान और कला क्षेत्र में गहरी सफलता के लिए उत्तम मानी जाती है।
✦ स्वामी: नाग देवता

21. कृष्ण षष्ठी

नंदा (आनंद)
कृष्ण पक्ष की यह षष्ठी तिथि 'नंदा' श्रेणी में आती है। हिन्दू पंचांग इसे वास्तुकला, शिल्प और नए वस्त्र-आभूषण धारण करने के लिए मध्यम रूप से फलदायी मानता है।
✦ स्वामी: कार्तिकेय

22. कृष्ण सप्तमी

भद्रा (कल्याण)
सप्तमी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह स्वास्थ्य संबंधी उपचार, सर्जरी, और चिकित्सा से जुड़े कार्यों की शुरुआत के लिए एक विशेष शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: सूर्य देव

23. कृष्ण अष्टमी

जया (विजय)
कालाष्टमी का दिन 'जया' श्रेणी का होता है। तंत्र साधना, योग, ध्यान और भगवान भैरव की विशेष कृपा के लिए हिन्दू पंचांग में यह सर्वाधिक शक्तिशाली तिथि है।
✦ स्वामी: भगवान शिव

24. कृष्ण नवमी

रिक्ता (खाली)
कृष्ण नवमी 'रिक्ता' संज्ञक होने के कारण किसी भी शुभ मांगलिक कार्य (विवाह, गृह प्रवेश) के लिए पूर्णतः निषिद्ध है।
✦ स्वामी: माँ दुर्गा

25. कृष्ण दशमी

पूर्णा (पूर्णता)
दशमी तिथि 'पूर्णा' होने के कारण अत्यंत शुभ है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सरकारी कार्य, पदभार ग्रहण और यात्राओं के लिए यह दिन शुभ परिणाम और सफलता देता है।
✦ स्वामी: यमराज

26. कृष्ण एकादशी

नंदा (आनंद)
यह 'नंदा' संज्ञक तिथि है जो पापों के नाश और आत्म-शुद्धि के लिए वैदिक ज्योतिष में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
✦ स्वामी: विश्वेदेव

27. कृष्ण द्वादशी

भद्रा (कल्याण)
द्वादशी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है, जो एकादशी व्रत का पारण करने का पवित्र दिन है। हिन्दू पंचांग के अनुसार दान-पुण्य, परोपकार और स्थिर कार्यों के लिए यह एक उत्तम शुभ मुहूर्त है।
✦ स्वामी: भगवान विष्णु

28. कृष्ण त्रयोदशी

जया (विजय)
यह 'जया' तिथि कृष्ण पक्ष के शिव प्रदोष व्रत का दिन है। आरोग्य प्राप्ति और शिव आराधना के लिए यह वैदिक ज्योतिष में प्रभावशाली मानी गई है।
✦ स्वामी: कामदेव / शिव

29. कृष्ण चतुर्दशी

रिक्ता (खाली)
मासिक शिवरात्रि का पावन दिन 'रिक्ता' श्रेणी में आता है। भौतिक व कोमल मांगलिक कार्य इस दिन पूर्ण रूप से वर्जित हैं।
✦ स्वामी: भगवान शिव

30. अमावस्या

पूर्णा (पूर्णता)
अमावस्या वैदिक ज्योतिष की 'पूर्णा' तिथि है जब चंद्रमा अदृश्य रहता है। पितृ तर्पण, श्राद्ध, और ध्यान के लिए यह विशेष महत्व रखती है।
✦ स्वामी: पितृ देव
आज की तिथि (Aaj Ki Tithi) | हिन्दू पंचांग और तिथियों का महत्व - विस्तृत जानकारी

आज की तिथि एवं पंचांग रहस्य

॥ श्री गणेशाय नमः ॥

"तिथेश्र्व श्रियमाप्नोति वारादायुष्यवर्धनम्।
नक्षत्राद्धरते पापं योगाद्रोगनिवारणम्॥"

(तिथि से लक्ष्मी (धन-समृद्धि) की प्राप्ति होती है, वार से आयु बढ़ती है, नक्षत्र से पापों का नाश होता है और योग से रोगों का निवारण होता है। पंचांग श्रवण का यह महात्म्य है।)

भारतीय वैदिक ज्योतिष में 'तिथि' (Lunar Day) काल गणना का प्राण है। सूर्य और चन्द्रमा के परस्पर कोणीय अंतर से निर्मित होने वाली तिथि, हमारे दैनिक जीवन, मानसिक स्थिति और आध्यात्मिक चेतना को गहरे स्तर पर प्रभावित करती है।

तिथि का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक स्वरूप

आधुनिक खगोल विज्ञान के अनुसार, जब चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए सूर्य से अंशों (Degrees) में दूर जाता है, तो उस कोणीय दूरी को तिथि कहा जाता है।

सूक्ष्म गणना सिद्धांत

सम्पूर्ण भचक्र 360 डिग्री का होता है। इसमें सूर्य और चन्द्रमा की गतियों का अंतर जब 12 डिग्री (12°) हो जाता है, तब एक 'तिथि' पूर्ण होती है।

  • अमावस्या: जब सूर्य और चन्द्रमा एक ही अंश पर होते हैं (0 डिग्री अंतर)।
  • प्रतिपदा: जब चन्द्रमा सूर्य से 0° से 12° तक आगे बढ़ता है।
  • पूर्णिमा: जब चन्द्रमा सूर्य से ठीक 180° सामने होता है।

क्योंकि चन्द्रमा की गति दिन-प्रतिदिन बदलती रहती है, इसलिए एक तिथि का मान कभी 19 घंटे तो कभी 26 घंटे तक हो सकता है। इसी कारण कभी-कभी एक ही अंग्रेजी तारीख में दो तिथियां पड़ जाती हैं (तिथि क्षय) या एक तिथि दो दिनों तक चलती है (तिथि वृद्धि)।

पक्ष विचार: शुक्ल और कृष्ण

एक चन्द्र मास को दो भागों (पक्षों) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक पक्ष में 15 तिथियां होती हैं, जो चन्द्रमा की कलाओं (Phases) का प्रतिनिधित्व करती हैं।

1. शुक्ल पक्ष (Waxing Phase)

अमावस्या के बाद जब चन्द्रमा का प्रकाश बढ़ने लगता है, उसे शुक्ल पक्ष या 'सुदी' कहते हैं।

प्रकृति: यह देवताओं का दिन माना जाता है। इसमें चन्द्रमा की शक्ति और शुभता बढ़ती है।

उपयोग: मांगलिक कार्य, विवाह, गृह प्रवेश, नई शुरुआत और विकासोन्मुखी कार्यों के लिए यह पक्ष श्रेष्ठ है।

2. कृष्ण पक्ष (Waning Phase)

पूर्णिमा के बाद जब चन्द्रमा का प्रकाश घटने लगता है, उसे कृष्ण पक्ष या 'बदी' कहते हैं।

प्रकृति: यह पितरों का समय माना जाता है। इसमें चन्द्रमा क्षीण होता है।

उपयोग: रोग मुक्ति, शत्रु दमन, तांत्रिक कर्म, कर्जा उतारने और आंतरिक शुद्धि (विरेचन) के लिए यह समय उपयुक्त है।

विस्तृत तिथि परिचय और फल

1. प्रतिपदा

नंदा (आनंद)

शुक्ल और कृष्ण पक्ष की पहली तिथि को प्रतिपदा कहा जाता है। इसे 'नंदा' तिथि की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है आनंद प्रदान करने वाली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन किसी भी नए कार्य, व्यापार या योजना का श्रीगणेश करना अत्यंत फलदायी होता है। हालाँकि, यह तिथि विवाह कार्यों के लिए मध्यम मानी जाती है, लेकिन गृह निर्माण, वास्तु शांति, और कृषि कार्यों के लिए यह सर्वोत्तम है। कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को बलहीन माना जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अत्यंत शुभ और ऊर्जावान होती है।

✦ स्वामी: अग्नि देव

2. द्वितीया

भद्रा (कल्याण)

द्वितीया तिथि को 'भद्रा' संज्ञक माना गया है, जिसका अर्थ है कल्याणकारी। यह तिथि किसी भी कार्य की नींव रखने के लिए बहुत मजबूत मानी जाती है। यदि आप भवन निर्माण शुरू करना चाहते हैं, सरकारी नौकरी ज्वाइन करना चाहते हैं, या किसी स्थायी संपत्ति की खरीदारी करना चाहते हैं, तो द्वितीया तिथि अत्यंत शुभ है। यात्रा के लिए भी इसे अनुकूल माना जाता है। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक 'भाई दूज' इसी तिथि को मनाया जाता है, जो रिश्तों में मिठास और दीर्घायु का आशीर्वाद देता है।

✦ स्वामी: ब्रह्मा (विधाता)

3. तृतीया

जया (विजय)

जैसा कि इसके वर्ग 'जया' से स्पष्ट है, तृतीया तिथि विजय और शक्ति की प्रतीक है। यदि आपको कोर्ट-कचहरी के मामलों, प्रतियोगिताओं या किसी संघर्ष में सफलता चाहिए, तो इस तिथि का चयन करें। यह तिथि कला, संगीत, चित्रकला और शिक्षा आरम्भ करने के लिए भी सर्वश्रेष्ठ है। अक्षय तृतीया, जिसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसी तिथि का सबसे शुभ रूप है। इस दिन अन्नप्राशन और मुंडन जैसे संस्कार करना बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

✦ स्वामी: गौरी (माता पार्वती)

4. चतुर्थी

रिक्ता (खाली)

चतुर्थी तिथि को 'रिक्ता' श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है 'रिक्त' या खाली। इसलिए, इस दिन विवाह, गृह प्रवेश या किसी भी नए मांगलिक कार्य की शुरुआत करना वर्जित है, क्योंकि परिणाम शून्य हो सकते हैं। हालाँकि, यह तिथि शत्रु दमन, बाधाओं को हटाने, और कर्ज़ चुकाने के लिए अत्यंत शक्तिशाली है। चूँकि इसके स्वामी विघ्नहर्ता गणेश हैं, इसलिए इस दिन की गई गणेश पूजा और संकष्टी व्रत जीवन के सभी संकटों को हर लेते हैं। बिजली के उपकरण खरीदने या अग्नि संबंधी कार्यों के लिए भी यह तिथि उपयुक्त है।

✦ स्वामी: श्री गणेश

5. पंचमी

पूर्णा (पूर्णता)

पंचमी तिथि 'पूर्णा' तिथि है, अर्थात यह कार्यों को पूर्णता प्रदान करती है। यह तिथि लक्ष्मी प्राप्ति और धन संचय के कार्यों के लिए विशेष शुभ मानी जाती है। यदि आप किसी रोग से मुक्ति चाहते हैं, तो इस दिन औषध सेवन आरम्भ करना लाभकारी होता है। यह तिथि विद्या अध्ययन, सरस्वती पूजा और विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए भी अनुकूल है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा से कालसर्प दोष और राहु-केतु की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

✦ स्वामी: नाग देवता

6. षष्ठी

नंदा (आनंद)

षष्ठी तिथि पुनः 'नंदा' श्रेणी में आती है। यह तिथि विशेष रूप से शिल्प कला, वास्तुकला, और सौंदर्य प्रसाधनों के कार्यों के लिए शुभ है। नए वस्त्र और आभूषण धारण करने के लिए यह दिन उत्तम है। दक्षिण भारत में इस तिथि का विशेष महत्व है, जहाँ इसे स्कंद षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। हालाँकि, कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन तेल मालिश और काष्ठ (लकड़ी) से जुड़े कार्यों से बचना चाहिए। यह तिथि संतान की दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखने हेतु श्रेष्ठ है।

✦ स्वामी: कार्तिकेय

7. सप्तमी

भद्रा (कल्याण)

सप्तमी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है और इसके स्वामी भगवान सूर्य हैं। यह स्वास्थ्य, आरोग्य और ऊर्जा की प्राप्ति के लिए एक शक्तिशाली तिथि है। यदि आप लंबी यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो सप्तमी तिथि का चयन करें, यह यात्रा को सुखद बनाती है। विवाह, संगीत, और वाहन खरीदने के लिए भी यह तिथि अत्यंत शुभ है। इस दिन सूर्य उपासना करने से नेत्र रोग और हड्डियों के रोगों में लाभ मिलता है। सरकारी कार्यों में सफलता के लिए भी सप्तमी का दिन चुना जा सकता है।

✦ स्वामी: सूर्य देव

8. अष्टमी

जया (विजय)

अष्टमी तिथि 'जया' श्रेणी की एक अत्यंत प्रभावशाली तिथि है। यह शक्ति उपासना और विजय का दिन है। दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी जैसे बड़े पर्व इसी तिथि को मनाए जाते हैं। यदि आप किसी प्रतियोगिता, वाद-विवाद या खेलकूद में भाग ले रहे हैं, तो यह दिन आपको विजय दिला सकता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह तिथि बहुत ऊर्जावान है, लेकिन विवाह जैसे कोमल कार्यों के लिए इसे अक्सर टाला जाता है क्योंकि इसमें उग्र ऊर्जा की प्रधानता होती है। रत्न धारण करने के लिए यह दिन शुभ है।

✦ स्वामी: भगवान शिव / रुद्र

9. नवमी

रिक्ता (खाली)

नवमी तिथि 'रिक्ता' संज्ञक है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल प्राप्त होने में कठिनाई होती है। इसलिए विवाह, सगाई या गृह प्रवेश के लिए यह तिथि पूर्णतः वर्जित है। हालाँकि, यह तिथि विध्वंसक कार्यों, जैसे शत्रु पर आक्रमण, शिकार, या पुरानी इमारतों को गिराने के लिए उपयुक्त है। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि अत्यंत पवित्र है क्योंकि भगवान राम का जन्म (राम नवमी) और महानवमी (दुर्गा पूजा) इसी दिन होती है। अतः, यह दिन भौतिक कार्यों के बजाय आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ है।

✦ स्वामी: माँ दुर्गा

10. दशमी

पूर्णा (पूर्णता)

दशमी तिथि 'पूर्णा' है, जो कार्यों में परिपूर्णता और सफलता लाती है। यह तिथि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की सिद्धि के लिए उत्तम है। गृह प्रवेश, विवाह, नया वाहन खरीदना, और पदभार ग्रहण करने के लिए दशमी तिथि सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक है। विजयादशमी (दशहरा) इस तिथि का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य असफल नहीं होता। यह तिथि मान-सम्मान और यश की वृद्धि करती है।

✦ स्वामी: यमराज

11. एकादशी

नंदा (आनंद)

एकादशी तिथि हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र तिथियों में से एक मानी जाती है। इसे 'नंदा' तिथि कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी, इस दिन उपवास रखने से शरीर और मन का शुद्धिकरण होता है और पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है। धार्मिक अनुष्ठान, कथा, कीर्तन और देव कार्यों के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है। हालाँकि, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। इस दिन विवाह और निर्माण कार्य भी शुभ माने जाते हैं, परन्तु मुख्य फोकस आत्म-शुद्धि पर रहता है।

✦ स्वामी: विश्वेदेव

12. द्वादशी

भद्रा (कल्याण)

द्वादशी तिथि 'भद्रा' संज्ञक है और इसके स्वामी भगवान विष्णु हैं। यह तिथि एकादशी व्रत के पारण के लिए जानी जाती है। यह दिन यज्ञ, हवन, और बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। नया घर बसाने, विवाह करने और लंबी यात्राओं के लिए यह तिथि अनुकूल है। यह तिथि स्थिरता प्रदान करती है, इसलिए शपथ ग्रहण या पदभार संभालने जैसे कार्यों के लिए भी इसका चयन किया जाता है।

✦ स्वामी: भगवान विष्णु

13. त्रयोदशी

जया (विजय)

त्रयोदशी तिथि 'जया' श्रेणी की है और भगवान कामदेव इसके स्वामी माने जाते हैं (कुछ मतों में शिव)। यह तिथि प्रदोष व्रत के लिए प्रसिद्ध है, जो भगवान शिव को समर्पित है। आरोग्य प्राप्ति, रोगों के नाश और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए यह तिथि अमोघ है। इस दिन नई औषधियों का निर्माण और सेवन लाभकारी होता है। यह तिथि सांसारिक सुख-सुविधाओं, वस्त्र-आभूषण खरीदने और यात्रा के लिए भी बहुत शुभ मानी जाती है। सायंकाल की शिव पूजा इस दिन विशेष फलदायी होती है।

✦ स्वामी: कामदेव

14. चतुर्दशी

रिक्ता (खाली)

चतुर्दशी तिथि 'रिक्ता' श्रेणी में आती है, इसलिए इसे क्रूर तिथि माना जाता है। इस दिन विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य पूरी तरह से वर्जित हैं। यह तिथि उग्र कार्यों, तंत्र-मंत्र साधना, और प्रेत बाधाओं के निवारण के लिए उपयुक्त है। मासिक शिवरात्रि इसी तिथि को होती है, इसलिए यह आध्यात्मिक साधना और ध्यान के लिए बहुत शक्तिशाली दिन है। भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन जलाभिषेक करना चाहिए। इस दिन यात्रा करने से कष्ट हो सकता है।

✦ स्वामी: भगवान शिव

15. पूर्णिमा (शुक्ल)

पूर्णता का प्रतीक

शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा कहलाती है, जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ चमकता है। यह तिथि अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान मानी जाती है। सत्यनारायण की कथा, यज्ञ, और किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्यों (विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश) के लिए यह सर्वश्रेष्ठ दिन है। इस दिन चंद्रमा का प्रभाव जल और मन पर सर्वाधिक होता है, इसलिए ध्यान और मानसिक शांति के उपाय इस दिन शीघ्र फल देते हैं। पूर्णिमा को किया गया दान और पूजा परिवार में समृद्धि लाती है।

✦ स्वामी: चंद्र देव

30. अमावस्या (कृष्ण)

पितृ कार्य हेतु

कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है, जब आकाश में चंद्रमा अदृश्य रहता है। यह तिथि पितृ कार्यों, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए समर्पित है। इस दिन किसी भी नए शुभ कार्य (जैसे विवाह या गृह प्रवेश) की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसमें 'सोम' (अमृत) की अनुपस्थिति होती है। हालाँकि, यह तांत्रिक साधनाओं, ध्यान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शक्तिशाली तिथि है। दीपावली जैसा महान पर्व भी इसी तिथि को मनाया जाता है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है।

✦ स्वामी: पितृ देव

तिथियों का वर्गीकरण और फल (संज्ञा विचार)

महर्षि पराशर ने 1 से 15 तिथियों को पाँच विशिष्ट समूहों में बाँटा है। प्रत्येक समूह (संज्ञा) का अपना एक विशेष स्वभाव और देवता होते हैं। सही तिथि का चयन कार्य की सफलता सुनिश्चित करता है।

1. नंदा तिथियां (आनंद प्रदाता)

01 प्रतिपदा (1st)

देवता: अग्नि

मांगलिक कार्य, विवाह और यात्रा के लिए शुभ। नवीन कार्यों का आरंभ।

06 षष्ठी (6th)

देवता: कार्तिकेय

भवन निर्माण, आभूषण और नवीन मित्रता के लिए श्रेष्ठ।

11 एकादशी (11th)

देवता: विश्वेदेव

व्रत, उपवास, आध्यात्मिक साधना और यज्ञ आदि के लिए परम पवित्र।

2. भद्रा तिथियां (कल्याणकारी)

02 द्वितीया (2nd)

देवता: ब्रह्मा

राजकीय कार्य, विवाह और यात्रा। चंद्र दर्शन का महत्व।

07 सप्तमी (7th)

देवता: सूर्य

वाहन क्रय, यात्रा और संगीत-कला सीखने के लिए उत्तम।

12 द्वादशी (12th)

देवता: विष्णु

दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए प्रशस्त।

3. जया तिथियां (विजय प्रदाता)

03 तृतीया (3rd)

देवता: गौरी (पार्वती)

शिल्प कार्य, अन्न प्राशन और पहली बार बाल कटवाने के लिए शुभ।

08 अष्टमी (8th)

देवता: शिव (रुद्र)

शस्त्र धारण, किलेबंदी और कठिन कार्यों में सफलता।

13 त्रयोदशी (13th)

देवता: कामदेव

यात्रा, वस्त्र-आभूषण धारण और सुख-उपभोग।

4. रिक्ता तिथियां (खाली/शून्य)

सावधानी: इन तिथियों में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

04 चतुर्थी (4th)

देवता: गणेश

शत्रु नाशन और बाधा निवारण। शुभ कार्यों में 'खल्ला' (हानि) तिथि मानी गई है।

09 नवमी (9th)

देवता: दुर्गा

हिंसक कर्म, शस्त्र निर्माण और वाद-विवाद के लिए।

14 चतुर्दशी (14th)

देवता: शिव/काली

तंत्र साधना, विष प्रयोग और क्रूर कर्म। शुभ कार्य सर्वथा वर्जित।

5. पूर्णा तिथियां (पूर्णता कारक)

05 पंचमी (5th)

देवता: नाग

औषधि सेवन, शल्य चिकित्सा और स्थिर कार्यों के लिए श्रेष्ठ।

10 दशमी (10th)

देवता: यम/धर्म

गृह प्रवेश, विवाह और राजकीय यात्रा के लिए अत्यंत शुभ।

15 पूर्णिमा/अमावस्या

देवता: चन्द्र/पितृ

पूर्णिमा: यज्ञ और मंगल कार्य। अमावस्या: पितृ तर्पण और दान।

सिद्ध योग और मृत्यु योग (वार-तिथि संयोग)

जब कोई विशेष तिथि किसी विशेष वार (Day) को पड़ती है, तो वह अत्यधिक शक्तिशाली (सिद्ध) या विनाशकारी (दग्ध/मृत्यु) योग बनाती है।

वार (Day)सिद्ध योग (अत्यंत शुभ)दग्ध/मृत्यु योग (अशुभ)
रविवारजया (3, 8, 13)नंदा (1, 6, 11)
सोमवारनंदा (1, 6, 11)भद्रा (2, 7, 12)
मंगलवारभद्रा (2, 7, 12)जया (3, 8, 13)
बुधवारजया (3, 8, 13)नंदा (1, 6, 11)
गुरुवारपूर्णा (5, 10, 15)रिक्ता (4, 9, 14)
शुक्रवारनंदा (1, 6, 11)भद्रा (2, 7, 12)
शनिवाररिक्ता (4, 9, 14)पूर्णा (5, 10, 15)

टिप्पणी: सिद्ध योग में किया गया कार्य अल्प प्रयास में सफल होता है, जबकि दग्ध योग में कार्य निष्फल होने की संभावना रहती है।

तिथि विशेष भोजन निषेध (स्वास्थ्य विज्ञान)

आयुर्वेद और धर्मशास्त्रों के अनुसार, तिथियों में वायुमंडल और शरीर के रसों में परिवर्तन होता है। अतः विशिष्ट तिथियों पर विशिष्ट खाद्य पदार्थों का त्याग करना चाहिए।

प्रतिपदा कुम्हड़ा (Pumpkin)
द्वितीया बैंगन/कटहल
तृतीया/त्रयोदशी परवल
चतुर्थी मूली
पंचमी बेल फल
षष्ठी नीम की पत्ती
सप्तमी ताड़ का फल
अष्टमी नारियल
नवमी लौकी
दशमी कलम्बी साग
एकादशी चावल/सेम
द्वादशी पोई का साग

तिथि क्षय और तिथि वृद्धि

जब कोई तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाए (सूर्योदय न देखे), उसे 'क्षय तिथि' कहते हैं। यह अत्यंत अशुभ मानी जाती है।

इसके विपरीत, जब एक तिथि एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक (दो दिन) व्याप्त रहे, उसे 'वृद्धि तिथि' कहते हैं। यह सामान्यतः शुभ होती है।

पंचांग का सार

तिथि केवल कैलेंडर का अंक नहीं है, यह ब्रह्मांडीय घड़ी की सुई है। जिस प्रकार ज्वार-भाटा समुद्र को प्रभावित करता है, उसी प्रकार तिथियां हमारे शरीर में उपस्थित 70% जल और मन को प्रभावित करती हैं। पंचांग के अनुसार आचरण करने से जीवन में प्राकृतिक लय और संतुलन बना रहता है।

॥ इति शुभम् ॥

अस्वीकरण: यह जानकारी वैदिक शास्त्रों पर आधारित है। किसी भी विशेष मुहूर्त या निर्णय के लिए अपने कुल पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

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